जय जय शंकर हर हर शंकर
 
 
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Jayendra Saraswathi Swamigal
हिन्दु धर्म प्रश्नोत्तर के रूप में एक प्रदर्शन पूज्यश्री श्री जयेन्द्र सरस्वती स्वामीजी भाग - १

१. हमारे देश का नाम क्या है?
हमारे देश का नाम भारत-वर्ष है

२. भारत-वर्ष की सीमायें क्या है?
भौतिक रूप से भारत की सीमायें छोटी होने पर भी पूरे विश्वभर में भारतवर्ष का प्रभाव फैला हुआ है.

३. इस कथन का प्रमाण क्या है?
मनुस्मृति के अनुसार विभिन्न देशों के लोगों ने हमारे देश के पांडित्यपूर्ण ज्ञानियोँ से, एक व्यक्ति के चरित्र का गढन कैसे करना है, इस विषय को सीखा, सीख रहे हैं और सीखेंगे. संसार के चारों ओर से हमारे भारत की संस्कृति और सभ्यता के नमूनों को पुरातत्वज्ञों ने भी संगृहीत किया है.

४. हमारे धर्म का नाम क्या है?
हमारा धर्म वैदिक सनातन हिन्दु धर्म कहा जाता है. अर्थात् हमारे धर्म का प्रधान धर्म-ग्रन्थ वेद ही हैं.

५. वेद कितने होते है?
ध्वनि के रूप में वेद अनन्त होते है. परन्तु वेद व्यास मुनि ने इस ध्वनि - जनश्रुति को एकत्रित करके ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के नाम से चार वेदों के रूप में वर्गीकरण करके प्रदान किया.
हिन्दु धर्म प्रश्नोत्तर के रूप में एक प्रदर्शन पूज्यश्री श्री जयेन्द्र सरस्वती स्वामीजी भाग - २

१. कर्म का सिद्धान्त क्या है?
जो वेदों के द्वारा प्रमाणित और प्रतिपादित किया गया होता है वही कर्म का सिद्धान्त होता है.

२. धर्म और कर्म के कितने रूप होते हैं?
धर्म और कर्म दोनों एक ही होता है. पर स्थान और समय और जो व्यक्ति इसकी साधना करता है आदि के अनुसार वे अनेक रूप लेते है.

३. जनता के सामान्य धर्म क्या होता है?
तीन भिन्न-भिन्न धर्म सामान्य होता है. वे व्यक्तिगत धर्म, कुल धर्म और राष्ट्रीय धर्म होता है.

४. धर्म से क्या प्रतिफल मिलता है?
धर्म का फल तो पुण्य या नैतिकता होता है जिससे प्रसन्नता प्राप्त होती है.

५. अधर्म क्या होता है?
वेदों के आदेश के विरुद्ध वाले कर्म को करना अधर्म कहा जाता है.

६. अधर्म के परिणाम क्या होते है?
अधर्म के परिणाम पाप या पातक होता है जो शोक की और ले जाताहै.

श्री कांची कामकोटी सेवा केंद्र - डम्बो गाँव , रांची
"विद्या-वैधिया-वेध" ही श्री कांची कामकोटी सेवा केंद्र का प्रधान उद्देश्य है | विश्व कि द्ध्रुष्टि को स्थानीय कार्यों में रूप्नाथर करने का ये साचा चिंथन हैं | जो लोग मूल आवश्यकताओं के लिये भी कम सुविधादार और कम मदद पानेवाले होते हैं | केंद्र के प्रधान कार्यक्रम इस प्रकार हैं :
१. आसपास गावों के बच्चों को प्रारम्बिक शिक्षा प्रधान करना |
२. प्रधान सास्थिय की देख-रेख की सुविधा का प्रबंध करना |
३. धर्म के मार्ग पर चलने के लिए सांस्क्रुथिक मूल्योम को मन में बिठाना |

Kanchi Kamakoti Seva Kendra Logo संकेत सिंह के बारे में

जगतगुरु के छाया ने (छाया चित्र दारा चिंतित) सर्वव्यापक विशव के सभी सीमाओं के परे होकर मानवता की उन्नती के लिए ज्ञान और समृधि प्रधान किये |
 

जगतगुरु के छाया ने (छाया चित्र दारा चिंतित) सर्वव्यापक विशव के सभी सीमाओं के परे होकर मानवता की उन्नती के लिए ज्ञान और समृधि प्रधान किये |

आदि संकराचार्य और राष्ट्रीय एकीकरण के परिसंवाद के अवसर पर २३ जून, २००९ को सीरी किला, नयी दिल्ली पर कांची कामकोटी पीट के ७० वें धर्माचार्य पविथ्रवर श्री संकर विजयेन्द्र सरस्वती स्वामीजी की द्धारा किये गये बाषण का हिंदी अनुवाद |

- एक सम्क्षिप्थ ध्रुष्टि

वेबसाइट उप्दतेद ०८.०५.२०१०
 
 
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